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बच्चो को कैसे पढ़ाये ? सिखाये | आप भी जाने ये तरीके और बच्चो को समझदार बनाए

बच्चो-को-कैसे-पढ़ाये-ऑर-होनहर-कैसे-बनाए-इन-सिम्पल-rule

बच्चो को कैसे पढ़ाये यह सवाल हर माता  पिता के मन मे आता है।

आजकल समय तेजी से बदल रहा है,भारत सरकार द्वारा भी अभी नए नए तरीके अपनाए जा रहे है।

ताकि बच्चो पर पढ़ाई का बोझ कम हो सके।इसमे कोई आश्चर्य नहीं है कि हर बच्चा अलग होता है उनके सोचने समझने,

बातचीत करने , खेल–कूद में सहभागी होने, शारीरिक स्फूर्ति,इत्यादि सभी बातो में वे एक-दूसरे से अलग होते है।

इसी प्रकार प्रत्येक बच्चे का पठन का नई चीजें सीखने का कीसी काम  करने के लिए प्रेरित होने का भी  एक निश्चित तरीका होता है।

कुछ बच्चो के अनेक तरिके भी हो  सकते है और कुछ के नही भी होते। परंतु बच्चा क्या करता है कैसे करता है

इसमें बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका उसके माता पिता की ही होती है।

प्रत्येक माता पिता यदि अपने बच्चे की इन छोटी छोटी प्रतिभाए खूबियों को पहचानने लगे,

तो यही बच्चे बड़े होकर जीवन मे कई सफलताए पा सकते है ।
माता पिता द्वारा लक्ष देने पर बच्चो में किसी भी चीज को सीखने की प्रवुत्ति तेज होती है

वह प्रभावी ढंग से कम करते है उन्हें अवधारणाओं को तेज, आसान or अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सहायता मिलती है।

आइये जानते है वो कौनसी चिजे है जो आपको इन बतो को समझने मे मदत करेंगी।

बच्चो को कैसे पढ़ाये, सीखने में मदत करे, कुछ मुख्य प्रकार की शैलियों (तरीको ) का उपयोग आप कर सकते है।

  • तार्किक (logical) क्षमता को बढ़ाना
  • मौखिक या भाषा के माध्यम से (linguistic)
  • शारीरिक क्षमता (physical ability)
  • समान उम्र और बड़ो को देखकर
  • कल्पना शक्ति को बढ़ाकर

बच्चो को कैसे पढ़ाये जिससे उनकी  तार्किक क्षमता को बल मिले :

सबसे पहले friestly बच्चा किसी भी चीज को समझने में उसके पीछे क्या बाते है? कारण है? ऐसा क्यों है? यह जानना चाहता है

और जानकर ही दम लेता है उसके बाद ही वह उस चीज को सही या गलत के रूप में देखता है ऐसी प्रवर्त्ति ही तार्किक क्षमता है

आपको इसे बढ़ावा देना चाहिए। ऐसे बच्चे किसी भी चीज को समझने के लिए जल्दी से जानकारी प्राप्त करते है।

किसी भी समस्या को हल करने के नए नए उपाय खोजते है।

मौखिक या भाषा के माध्यम से (linguistic) :

दूसरा यह की अपने बच्चे को किस्से कहानियों की पुस्तकें पढ़कर सुनाए या उन्हे पढ़ने के लिए भी प्रेरित करे

जिससे कि उनकी भाषाओं को समझने की क्षमताअच्छी हो सिंपल सी बात है

अगर उसकी भाषा पर पकड़ अच्छी होंगी तो उसे कुछ भी समझने में आसानी होगी,

उन्हें लिखने और पढ़ने में रुचि पैदा होगी यह कुछ भी पढ़ने की आदत उनके जीवन का हिस्सा बन जाएंगी।

neuroscience या neurology के शोधो में पाया गया है,की यदि बच्चा या कोई भी वयस्क मौखिक या भाषाओं के माध्यम से लिखना पढ़ना निरंतर करता है तो उसके दिमाग का विकास ज्यादा अच्छा होता है स्मरण शक्ति तेज होती है और वह बुद्धिमान बनता है

क्योंकि बच्चे छोटे होते है उनके दिमाग का पूरा विकास नही हुआ होता इसलिए यह ज्यादा फायदेमंद साबित होता है लेकिन वयस्क जिनका दिमाग वजकसित हो चुका है उन्हें थोड़ा समय लगता है पर बच्चे यह सब जल्दी सिख लेते है।

उन्हें लिखने और पढ़ने में रुचि पैदा हो किस्से कहानी इत्यादि जिससे कि यह उनकी व्यक्तिमत्व का एक भाग बन जाये।

समान उम्र और बड़ो को देखकर :

बड़े जैसा करते है बच्चे भी वैसा ही करते है इसलिए आप यदि आदतें दिखएँगे कोई किताब पढ़ेंगे या कोई सही कार्य करेंगे तो वो भी ऐसा ही करेंगे चाहे वो कोई भी कार्य हो।बच्चो को लिखना कैसे सिखाये इस बात पर भी जरा अप ध्यान दे ऑर आपका बच्चा कैसी संगत में है।

क्या कर रहा है उनके मित्र कैसे है यह बहुत ही आवश्यक बात है ।

क्योकी बहुत सी खोजो मेवैज्ञानिको द्वारा यह पाया गया है कि बचपन की संगत में अच्छेया बुरे प्रभाव बच्चो पर पड़ते है वे जीवनमें बगत ही गहरी छाप छोड़ते है।

एक बहुत ही मशहूर मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट बंदुरा(Albert Bandura)नेBo-Bo Doll  experiment किया था।

जिसमे उसने 2 ग्रुप्स में बच्चो को बात दिया उनमे से कुछ बच्चो को एक वयस्क(Adult)को गुस्सा करते हुए दिखाया और दूसरे कुछ बच्चो को प्रेम और आदर की भावना प्रकट करते हुए दिखाया और फिर उन्हें 1 गुड़िया के साथ अकेले कमरे में छोड़ दियाइसका परिणाम ये हुआ कि जिन बच्चोने बड़ो को गुस्सा और आक्रामकता प्रकट करते देखब था उन्होंनेउस गुड़िया के साथ भी बड़ो जैसा ही किया मगर जिन्होंने बड़ो को प्रेम और आदर करते देखा था

उन्होने  गुड़िया के साथ प्रेम और आदर का भाव दिखाया इससे यही पता चलता है,

कि बच्चे जो देखते है वैसा ही सीखते है बच्चो पर उनकी संगत का भी बहुत असर होता है।

उनके मित्रों को जाने ऑर उन पर ध्यान दे यदि कुछ गलत हो तो प्रेम से समझाए।

शारीरिक क्षमता बढ़ाकर :

कोई भी व्यकिऑर बच्चे  जो शारीरिक रूप से स्वस्थ होते है उसका मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा होता है क्योकि जब हम किसी भी शरीरिक कसरत या व्यायाम (exercise) मे हिस्सा लेते है तो हमारे शरीर मे रक्त का बहाव तेज होता है ऑर नया रक्त बनने मे भी सहायता मिलती हैं।

व्यायाम करने से खून का बहाव हमारे शरीर मे तेज होता है or रक्त मे ऑक्सीजन(oxygen) की मात्रा बढ़ती है।

जिससे हमारा शरीर और दिमाग में यह oxygen से भरपूर रक्त (Blood) पहुँचता है और हम मानसिक और शारीरिक तौर से अधिक शक्तिशाली ( Powerful) बनते है। साथ  ही Chess और Puzzles, Rubikcube जैसे कई खेलो से भी आप अपने बच्चो का  बुद्धिबल (Intelligence) बढ़ाने में मदत कर सकते है।

कल्पना शक्ति को बढ़ा कर :

  • बच्चो की कल्पना शक्ति एक वयस्क व्यक्ति से बहोत ज्यादा अछि होती है।
  • उनकी सोच को सही आकार देना हर मटा पिता की ज़िम्मेदारी होती है।
  • बच्चो की memory याद्दाश बहोत तेज़ होती है। इसे नियमित प्रकटिस व अभ्यास  से ऑर तेज़ किया जा सकता है।
  • कल्पना शक्ति बहोत  ही महत्वपूर्ण है छोटे बचो के विकास के लिए किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए उसका प्रारूप कैसा है
  • क्या होगा कैसा होगा इन सब बातों को एक चित्र के रुप में सोचने मे मदत  मिलती है।

कुछ important प्रमुख बाते :

  • घर का वातावरण अपने :

किसी भी व्यक्ति के घर का वातावरण उसके विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभात है जिससे बच्चो को नया सिखने के लिये प्रेरणा मिलती है।

  • अपने बच्चे की रुचियों को पहचाने:

उसके पसंद नापसन्द को पहचाने उसे संगीत पसन्द है चित्रकारिता का छंद है या खेल कूद में रुचि रखता है जो भी है उसमें उसका प्रोत्साहन करे।

  • खेल के माध्यम से बच्चो को सिखाये:

कोई भी चीज सीखने के लिए खेल खेल।में सिखाये जैसे मैन लीजिये गणित ही हो तो दो और दो चॉकलेट कितने होते है,

या फिर खवलते खेलते कविता बोलना सिखाए इत्यादि। बच्चो को मोबाइल से नुकसान ना हो इस बात का भी ध्यान रखे ।

  • स्मार्ट लर्निंग: In conclusion

बच्चो को मोबाइल में वीडियो कहानिया  दिखा कर आप उसे कुछ नया सिख सकते है।

बच्चे ऐसे चीजो से देखकर जल्दी सीखते है।

बच्चो को कैसे समझाये यह बहोत ही जरूरी बात है इस बात पर जरूर ध्यान दे ।

  • अपने बच्चे का मनोबल बढाये उसकी बातों को ध्यान से सुनेउसकेहरसवालकाउत्तरदेमनोवैज्ञानिकी शोधों से पता चला है,

कि जिन बच्चो को उनके माता पिता द्वारा ड़याँ दिया जाता है

वह अपनी भावनाओं को सही से दूरों के सामने व्यक्त करने में समक्ष बनते है

और सवाल पूछने जानने समझने में कभी कतराते नही।

  • उसकी सफलताओ को सेलिब्रेट करे: ऐसा करने सेउनका मनोबल बढ़ता है और वे किसी भीकाम को बेझिजक करते है
  • अपने बच्चे की खूबियोंपर ध्यान दे ना कि कमजोरियों पर ताकी वे आप को किसी से कम ना समझे।

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